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शाहिद-ईशान की नानी खदीजा अजीम का निधन शाहिद कपूर-ईशान खट्टर की नानी खदीजा अजीम का शनिवार को निधन हो गया। खदीजा, एक्ट्रेस नीलिमा अजीम की मां थीं। वह एक स्वतंत्रता सेनानी, लेखिका और संपादक भी थीं। अपनी नानी के निधन से भावुक ईशान ने सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरों के एक साथ एक इमोशनल पोस्ट शेयर किया है।       |       उपमुख्यमंत्री सिसोदिया के पास कार नहीं      |      गणतंत्र दिवस पर राजभवन में सम्मानित होंगे शहीदों के परिजन      |       फेसबुक ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम 'शिटहोल' लिखा      |      बीसीसीआई ने दो चयनकर्ताओं के लिए आवेदन मांगे, मुख्य चयनकर्ता एमसके प्रसाद और गगन खोड़ा का कार्यकाल खत्म      |       सारा की फिल्म 'लव आजकल' के ट्रेलर पर सैफ ने दिया रिएक्शन, कहा-'मेरी फिल्म का ट्रेलर ज्यादा अच्छा था'      |       भागवत ने कहा- जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सरकार कदम उठाए      |      दावोस में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की वार्षिक बैठक में भाग लेंगे मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ      |      ईरान के विदेश मंत्री बोले- अगर भारत चाहे तो अमेरिका को हमारे साथ परमाणु समझौते में वापस आने के लिए मना सकता है      |      अंडर-19 वर्ल्ड कप आज से; 16 टीमें 48 मैच खेलेंगी      |       जजों के लिए अपशब्द बोलने पर हाईकोर्ट चीफ जस्टिस ने वकीलों पर दिए एफआईआर दर्ज करने के आदेश      |      सहिष्णुता की संस्कृति है भारत की पहचान - मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ      |      भाजपा के 57 प्रत्याशी घोषित      |       सीबीएसई की टेली काउंसलिंग 1 फरवरी से होगी शुरू      |      जयपुर के दर्शनीय स्थल      |      कॉन्ट्रेक्ट से बाहर होने के बाद MS Dhoni का BCCI को करारा जवाब      |      Sidharth Shukla की मां ने घर में की एंट्री, सबसे पहले Rashami Desai से मिली तो कहा ऐसा      |      17 जनवरी तक सभी स्‍कूलों में छुट्टी घोषित      |       हज के लिए 224 सीटें अधिक मिलीं, भोपाल में कल होगा कुर्रा      |      सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम कंपनियों की अर्जी खारिज की      |       जिला परिषद चुनाव: गडकरी-फडणवीस के घर नागपुर में भाजपा हारी      |      पाक आर्मी के प्रवक्ता ने दी दीपिका को शाबाशी      |       इंटरनेशनल क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बुधवार को ताजा टेस्ट रैंकिंग जारी की। भारतीय कप्तान विराट कोहली 928 अंक के साथ शीर्ष पर बरकरार हैं।      |      बल्लेबाजों में कोहली, गेंदबाजों में कमिंस टॉप पर; बुमराह समेत 3 भारतीय बॉलर टॉप-10 में शामिल      |      कन्फेक्शनेरी क्लस्टर में अक्टूबर से शुरु हो उत्पादन : मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ      |      हिमाचल में 4 फीट तक बर्फ गिरी, शिमला में 43 पर्यटक बचाए गए      |      India vs Sri Lanka 2nd T20I Live Score: ओपनरों ने टीम इंड‍िया को दी तेज शुरुआत      |      बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की 'छपाक' (Chapaak) इसी महीने 10 जनवरी को रिलीज होने वाली है. ऐसे में एक्ट्रेस इन दिनों फिल्म के प्रमोशन में काफी बिजी चल रही हैं. दीपिका पादुकोण ने 'छपाक' का प्रमोशन कई रिएलिटी शो में भी किया.       |      सभी जेलों और न्यायालयों में लगे वीडियो कान्फ्रेंसिंग उपकरण      |      मैदानी अनुभव से सरकार को लाभान्वित करें उद्योग और व्यवसाय      |      

आनंद की बात

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं के लिए टेली काउंसलिंग 1 फरवरी से शुरू होगी।
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पूर्व आरबीआई गवर्नर राजन ने कहा- देश में मंदीBookmark and Share

 आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि देश की विकास दर धीमी है। एक मैगजीन में उन्होंने लिखा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अस्वस्थता के संकेत मिल रहे हैं। देश में सत्ता का बहुत ज्यादा केंद्रीकरण हो गया है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पास ही सारी शक्तियां हैं। उनके मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं हैं।

राजन ने कहा, “यह समझने के लिए कि क्या गलत हुआ, हमें सबसे पहले मौजूदा सरकार में केंद्रीकृत व्यवस्था के साथ शुरुआत करने की जरूरत है। न केवल बड़े फैसले पीएमओ में लिए जाते हैं, बल्कि विचारों और योजनाओं को भी प्रधानमंत्री के आसपास मौजूद लोगों का एक छोटा सा समूह तय करता है। यह तरीका पार्टी के राजनीतिक और सामाजिक एजेंडे के ठीक है, क्योंकि तमाम लोग आर्थिक मामले के जानकार हैं। आर्थिक सुधारों के मामले में यह तरीका कारगर नहीं है, क्योंकि शीर्ष पर बैठे लोगों के पास इस विषय की व्यवस्थित जानकारी नहीं होती। उन्हें इस बात की समझ होती है कि राज्यों के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था कैसे काम करती है।” 

बुरी खबर को दबाने से हालात नहीं बदलेंगे: राजन

राजन ने कहा, ‘‘आर्थिक मंदी की समस्या से उबरने के लिए मोदी सरकार को पहले समस्या को स्वीकार करना होगा। हर आंतरिक या बाहरी आलोचना को राजनीतिक ब्रांड के तौर पर पेश करने से हल नहीं निकलेगा। समस्या को अस्थायी मानने की आदत बदलनी होगी। सरकार को समझना होगा कि बुरी खबर या किसी असुविधाजनक सर्वे को दबाने से हालात नहीं बदलेंगे। भारत ग्रामीण इलाकों में अर्थव्यवस्था का यह संकट और गहराएगा। किसी भी मुद्दे पर केवल तभी काम होता है, जब पीएमओ उस पर ध्यान देता है। जब पीएमओ का फोकस किसी दूसरी जगह चला जाता है, तो सारी प्रक्रिया थम-सी जाती है।” 


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