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रेलवे के अस्पतालों में होगा सभी सरकारी कर्मियों का इलाजBookmark and Share


कोरोना के खिलाफ लड़ाई में मदद के लिए रेलवे ने एक और कदम उठाया है। रेलवे ने सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अपने अस्पतालों को सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए खोलने का एलान किया है। आमतौर पर रेलवे के अस्पतालों में उसके ही कर्मचारियों के इलाज की अनुमति रहती है।

रेलवे की ओर से जारी बयान में कहा, 'कोविड-19 के कारण बनी संकट की स्थिति में रेल मंत्रालय ने फैसला किया है कि अपना पहचान पत्र दिखाकर सभी सरकारी कर्मचारी रेलवे के अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे।' कोरोना से लड़ाई की दिशा में रेलवे ने पहले ही 14 अप्रैल तक अपनी सभी यात्री सेवाएं रोक दी हैं। फिलहाल केवल आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मालगाड़ी के संचालन की अनुमति है। रेलवे की कई निर्माण इकाइयों में सैनिटाइजर, मेडिकल कोट और कई अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण का उत्पादन भी किया जा रहा है। रेलवे ने सोशल डिस्टेंसिंग में मदद के लिए कई जगहों पर सब्जी बाजार लगाने के लिए अपनी जमीनें भी दी हैं। रेलवे कोच को क्वारंटाइन सेंटर बनाने पर भी काम हो रहा है।

कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर सहित केंद्रीय रेलवे अस्पतालों में दस से 15 बेड के आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं। लेकिन विषम परिस्थिति में वार्ड कम भी पड़ सकते हैं। ऐसे में रेलवे बोर्ड खाली बोगियों का उपयोग वार्ड के रूप में करने की तैयारी में है। हालांकि, अभी जोनल कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश नहीं दिए गए हैं। फिर भी पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने अंदर ही अंदर अपनी भी तैयारी शुरू कर दी है। जानकारों के अनुसार बोगियों में बर्थ के अलावा टॉयलेट और वाश बेसिन भी होता है। बोगियां चारो तरफ से सुरक्षित होती हैं। इसे रेलवे स्टेशन या अस्पताल परिसर के आसपास कहीं भी आसानी से खड़ा भी किया जा सकता है। ऐसे में आइसोलेशन वार्ड बनाने में खाली बोगियां सर्वाधिक उपयुक्त होंगी। ऐसे आइसोलेशन वार्ड देश के अलग-अलग क्षेत्रों में बनाया जा रहा है।


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