Today Visitor :
Total Visitor :


INDvsAUS: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत के इरादे से उतरेगी टीम इंडिया      |      डोकलाम विवाद: भारत-चीन की सीमा से सटे पोस्टों पर फौज की तैनाती बढ़ी      |      IIFA में कंगना‌ पर छींटाकशी के सवाल से श्रद्धा कपूर ने यूं काटी कन्नी      |       कांगो में अगवा किया गया भारतीय नागरिक रिहा: सुषमा      |      झमाझम बारिश में भीगा पूरा भोपाल, अगले 24 घंटे ऐसा ही बना रह सकता है मौसाम      |      वुमेंस वर्ल्ड कप का पहला सेमीफाइल आज, इंग्लैंड-दक्षिण अफ्रीकी के बीच भिड़ंत      |      मैं रिश्तों को लेकर उतना अच्छा नहीं हूं : शाहरूख खान      |      राष्ट्रपति चुनाव में करीब 99% मतदान, 20 जुलाई को आएगा फैसला      |      मैं रिश्तों को लेकर उतना अच्छा नहीं हूं : शाहरूख खान      |      भारत और अमेरिका बढ़ाएंगे रक्षा सहयोग, 621.5 अरब डॉलर का बिल मंजूर      |      आज भोपाल में गरज- चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी के आसार      |      कमाल खान फिर से ‘ओ ओह जाने जाना’ गाना लाना चाहते हैं      |      कभी नहीं सोचा था इतने विम्बलडन खिताब जीतूंगा: फेडरर      |      राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान जारी, सपा में फूट, शिवपाल ने कोविंद को दिया वोट      |      राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग जारी, सीएम समेत 208 विधायकों ने डाला वोट      |      डोकलाम पर कोई समझौता नहीं होगा, भारत सेना हटाए तभी होगी बात: चीनी मीडिया      |      अमरनाथ      |      अमरनाथ      |      श्रीदेवी के साथ दोबारा काम करना चाहते हैं अक्षय खन्ना      |      श्रीदेवी के साथ दोबारा काम करना चाहते हैं अक्षय खन्ना      |      रोजर फेडरर रिकॉर्ड आठवी बार बने विंबलडन चैंपियन      |      राष्ट्रपति चुनाव के लिए कल होगी वोटिंग      |      राष्ट्रपति चुनाव पर बोलीं सोनिया      |      हॉस्पिटल में स्वस्थ वातावरण बनाने में पेंटिंग्स की अहम भूमिका-राज्य मंत्री श्री सारंग      |      किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय किये जायेंगे      |      WWC 2017: कप्तान मिताली राज के शतक से भारत ने न्यूजीलैंड को दिया 266 रनों का लक्ष्य      |      GOLD थाली में शाहरुख ने ऐसे खाई दाल-बाटी, कटौरी-ग्लास भी थे सोने के      |      यूपी विधानसभा विस्फोटक कांड: सुरक्षा में चूक का बड़ा खुलासा, 100 में से 94 कैमरे नहीं कर रहे थे काम      |      3 दिन बाद हो सकती है फिर तेज बारिश, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्र अलर्ट पर      |      डोकलाम से सैनिक वापस नहीं बुलाने पर चीन ने भारत को दी स्थिति बिगड़ने की धमकी      |      

आनंद की बात

हर ग्रह का अपना रंग है और उसी से मिलते रंग वाला रत्न उससे संबंधित होता है। आइए जानते हैं कैसे पता करें कि आपने कोई गलत रत्न तो धारण नहीं कर लिया और किया है तो उ
आगे पढ़ेंअन्य विविध समाचार
देशभर में शुक्रवार आधी रात से गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स यानी जीएसटी लागू हो चुका है. इसके लागू होते ही कीमतों पर इसका असर दिखना शुरू हो गया है. नई टैक्स व्यवस्था एपल का प्रोडक्ट खरीदने की ख्वाहिश रखने वालों के लिए अच्छी खबर लाई है. नतीजतन अमेरिकी टे ...
आगे पढ़ें
शादी से पहले दूल्हा-दुल्हन को बहुत तैयारियां करनी पड़ती हैं. लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उन लड़कियों की जिनकी शादी होने वाली हैं. जी हां आज हम भावी दुल्हनों के लिए पपीते से जुड़े ऐसे घरेलु नुस्खे लेकर आएं हैं जो दुल्हनों की रंगत को निखार सकते हैं. चल...
आगे पढ़ें
अमरनाथBookmark and Share

अमरनाथ हिन्दुओ का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में १३५ सहस्त्रमीटर दूर समुद्रतल से १३,६०० फुट की ऊँचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) १९ मीटर और चौड़ाई १६ मीटर है। गुफा ११ मीटर ऊँची है।अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्यों कि यहीं पर भगवान शिव ने माँ पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था।

यहाँ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंगभी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में होने वाले पवित्र हिमलिंग दर्शन के लिए लाखो लोग यहां आते है। गुफा की परिधि लगभग डेढ़ सौ फुट है और इसमें ऊपर से बर्फ के पानी की बूँदें जगह-जगह टपकती रहती हैं। यहीं पर एक ऐसी जगह है, जिसमें टपकने वाली हिम बूँदों से लगभग दस फुट लंबा शिवलिंग बनता है। चन्द्रमा के घटने-बढ़ने के साथ-साथ इस बर्फ का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है। आश्चर्य की बात यही है कि यह शिवलिंग ठोस बर्फ का बना होता है, जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाए। मूल अमरनाथ शिवलिंग से कई फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती के वैसे ही अलग अलग हिमखंड हैं।

 
 
अमरनाथ गुफा में बर्फ से बना प्रकृतिक शिवलिंग

जनश्रुति प्रचलित है कि इसी गुफा में माता पार्वती को भगवान शिव ने अमरकथा सुनाई थी, जिसे सुनकर सद्योजात शुक-शिशु शुकदेव ऋषि के रूप में अमर हो गये थे। गुफा में आज भी श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई दे जाता है, जिन्हें श्रद्धालु अमर पक्षी बताते हैं। वे भी अमरकथा सुनकर अमर हुए हैं। ऐसी मान्यता भी है कि जिन श्रद्धालुओं को कबूतरों को जोड़ा दिखाई देता है, उन्हें शिव पार्वती अपने प्रत्यक्ष दर्शनों से निहाल करके उस प्राणी को मुक्ति प्रदान करते हैं। यह भी माना जाता है कि भगवान शिव ने अद्र्धागिनी पार्वती को इस गुफा में एक ऐसी कथा सुनाई थी, जिसमें अमरनाथ की यात्रा और उसके मार्ग में आने वाले अनेक स्थलों का वर्णन था। यह कथा कालांतर में अमरकथा नाम से विख्यात हुई।

कुछ विद्वानों का मत है कि भगवान शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने छोटे-छोटे अनंत नागों को अनंतनाग में छोड़ा, माथे के चंदनको चंदनबाड़ी में उतारा, अन्य पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर और गले के शेषनाग को शेषनाग नामक स्थल पर छोड़ा था। ये तमाम स्थल अब भी अमरनाथ यात्रा में आते हैं। अमरनाथ गुफा का सबसे पहले पता सोलहवीं शताब्दी के पूर्वाध में एक मुसलमान गडरिए को चला था। आज भी चौथाई चढ़ावा उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है। आश्चर्य की बात यह है कि अमरनाथ गुफा एक नहीं है। अमरावती नदी के पथ पर आगे बढ़ते समय और भी कई छोटी-बड़ी गुफाएं दिखती हैं। वे सभी बर्फ से ढकी हैं।

अमरनाथ यात्रा

अमर नाथ यात्रा पर जाने के भी दो रास्ते हैं। एक पहलगाम होकर और दूसरा सोनमर्ग बलटाल से। यानी कि पहलमान और बलटाल तक किसी भी सवारी से पहुँचें, यहाँ से आगे जाने के लिए अपने पैरों का ही इस्तेमाल करना होगा। अशक्त या वृद्धों के लिए सवारियों का प्रबंध किया जा सकता है। पहलगाम से जानेवाले रास्ते को सरल और सुविधाजनक समझा जाता है। बलटाल से अमरनाथ गुफा की दूरी केवल १४ किलोमीटर है और यह बहुत ही दुर्गम रास्ता है और सुरक्षा की दृष्टि से भी संदिग्ध है। इसीलिए सरकार इस मार्ग को सुरक्षित नहीं मानती और अधिकतर यात्रियों को पहलगाम के रास्ते अमरनाथ जाने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन रोमांच और जोखिम लेने का शौक रखने वाले लोग इस मार्ग से यात्रा करना पसंद करते हैं। इस मार्ग से जाने वाले लोग अपने जोखिम पर यात्रा करते है। रास्ते में किसी अनहोनी के लिए भारत सरकार जिम्मेदारी नहीं लेती है।

पहलगाम से अमरनाथ

पहलगाम जम्मू से ३१५ किलोमीटर की दूरी पर है। यह विख्यात पर्यटन स्थल भी है और यहाँ का नैसर्गिक सौंदर्य देखते ही बनता है। पहलगाम तक जाने के लिए जम्मू-कश्मीर पर्यटन केंद्र से सरकारी बस उपलब्ध रहती है। पहलगाम में गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से लंगर की व्यवस्था की जाती है। तीर्थयात्रियों की पैदल यात्रा यहीं से आरंभ होती है।

पहलगाम के बाद पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है, जो पहलगाम से आठ किलोमीटर की दूरी पर है। पहली रात तीर्थयात्री यहीं बिताते हैं। यहाँ रात्रि निवास के लिए कैंप लगाए जाते हैं। इसके ठीक दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है। कहा जाता है कि पिस्सु घाटी पर देवताओं और राक्षसों के बीच घमासान लड़ाई हुई जिसमें राक्षसों की हार हुई। लिद्दर नदी के किनारे-किनारे पहले चरण की यह यात्रा ज्यादा कठिन नहीं है। चंदनबाड़ी से आगे इसी नदी पर बर्फ का यह पुल सलामत रहता है।

चंदनबाड़ी से १४ किलोमीटर दूर शेषनाग में अगला पड़ाव है। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहीं पर पिस्सू घाटी के दर्शन होते हैं। अमरनाथ यात्रा में पिस्सू घाटी काफी जोखिम भरा स्थल है। पिस्सू घाटी समुद्रतल से ११,१२० फुट की ऊँचाई पर है। यात्री शेषनाग पहुँच कर ताजादम होते हैं। यहाँ पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की खूबसूरत झील है। इस झील में झांककर यह भ्रम हो उठता है कि कहीं आसमान तो इस झील में नहीं उतर आया। यह झील करीब डेढ़ किलोमीटर लम्बाई में फैली है। किंवदंतियों के मुताबिक शेषनाग झील में शेषनाग का वास है और चौबीस घंटों के अंदर शेषनाग एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं, लेकिन यह दर्शन खुशनसीबों को ही नसीब होते हैं। तीर्थयात्री यहाँ रात्रि विश्राम करते हैं और यहीं से तीसरे दिन की यात्रा शुरू करते हैं।

शेषनाग से पंचतरणी आठ मील के फासले पर है। मार्ग में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता हैं, जिनकी समुद्रतल से ऊँचाई क्रमश: १३,५०० फुट व १४,५०० फुट है। महागुणास चोटी से पंचतरणी तक का सारा रास्ता उतराई का है। यहाँ पांच छोटी-छोटी सरिताएँ बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है। यह स्थान चारों तरफ से पहाड़ों की ऊंची-ऊंची चोटियों से ढका है। ऊँचाई की वजह से ठंड भी ज्यादा होती है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से तीर्थयात्रियों को यहाँ सुरक्षा के इंतजाम करने पड़ते हैं।

अमरनाथ की गुफा यहाँ से केवल आठ किलोमीटर दूर रह जाती हैं और रास्ते में बर्फ ही बर्फ जमी रहती है। इसी दिन गुफा के नजदीक पहुँच कर पड़ाव डाल रात बिता सकते हैं और दूसरे दिन सुबह पूजा अर्चना कर पंचतरणी लौटा जा सकता है। कुछ यात्री शाम तक शेषनाग तक वापस पहुँच जाते हैं। यह रास्ता काफी कठिन है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुँचते ही सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।

बलटाल से अमरनाथ- जम्मू से बलटाल की दूरी ४०० किलोमीटर है। जम्मू से उधमपुर के रास्ते बलटाल के लिए जम्मू कश्मीर पर्यटक स्वागत केंद्र की बसें आसानी से मिल जाती हैं। बलटाल कैंप से तीर्थयात्री एक दिन में अमरनाथ गुफा की यात्रा कर वापस कैंप लौट सकते हैं।


पाठको की राय
1
आपकी राय
Name
Email
Description